Sunday, January 22, 2006

सुफीयाना मस्ती में सब “फकीर” बन गए

सहारा न्यूज ब्यूरो
बस्ती । 11 जनवरी ।
आडंबरो पर प्रहार, प्रेम की परिभाषा और साहेब(ईश्वर) की भक्ति पर गायन जब सूफीयाना लय में आया तो सब के सब “फकीर” हो गये । फकीरों की मस्ती और सूफी के रंग से नहाया गौरीदत्त धर्मशाला में आयोजित कबीर स्मृति समारोह । जिसमें ख्यातिलब्ध कबीर गायक भारती बन्धु ने सूफी अल्हडता से सभी को अलमस्त कर दिया । मस्ती ऐसी कि जैसे साहेब नजर से दिल में पैबस्त हो गये । फिर तो सर्द रात ज्यों-ज्यों बढती गयी लोगों के दिलों में कबीर वाणी जवां हो गयी ।
मूलतः रायपुर, छत्तीसगढ से पधारे स्वामी जी.सी.डी.भारती ने कबीर की माटी में कबीर की संवेदना को जब गीतों के माध्यम से प्रवाहित किया तो लोग कबीर को जीने लगे । भारती बंधुओं ने शुरूआत ही फकीराना अंदाज में की और फरमाया “मन लाग्यो मेरो यार फकीरी में” तो फिर लोग बैराग्य की पराकाष्ठा की अनुभूति कर कर जैसे साहेब से साक्षात्कार करने लगे हों । हाँलाकि भारती बंधु ने ईश्वर को पाने में दिक्कतों का हवाला कुछ यूँ दिया------- साहेब का घर दूर है जैसे पेड खजूर लेकिन मार्ग भी बतलाने का प्रयास किया । जिसके लिए उन्होंने साईं रंग में रंग जाने को ही साबेब तक पहुँचने की सीढी बताया । ---- जिनको साईं रंग दे, कभी न होत कुरंग । कबीर बन्धुओं ने लोगों को बाँधने के लिए उस्ताद शायरों के शेर उद्धृत करते हुए दोस्ती निभाते रहने की वकालत भी की । उनकी प्रस्तुति में श्रृंगार, लालित्य का भी विशेष प्रभाव रहा । जिसमें कार्यक्रम के दौरान लोग मंत्रमुग्ध होकर सूफियाना गायन पर झूमते रहे । उन्होंने आडंबरों पर कुछ यूं प्रहार किया – “गंग नहाये जे नर तरहें, मेढक क्यों न तरहे जिनके गंगा में घर है ।” उन्होंने आठ पहर, चौंसठ घडी में मेरे और न कोय, नैना माही तू बसे और नींद को ठौर न होय की तर्ज पर सिर्फ ईश्वर से जुडे रहने की अपील करते हुए माहौल को गंगा-जमुनी बनाने का प्रयास किया । और अपनी भाषा में कबीर के राम को भी परिभाषित किया तेरा साईं तुझमें है जाग सके तो जाग को उद्धृत करते हुए उन्होंने लोगों से बस तू- ही- तू में रम जाने की अपील की । कार्यक्रम का संयोजन किया हिन्दुस्तान समाचार, के प्रतिनिधि दिनेश दुबे ने। जबकि कार्यक्रम के शुभारम्भ दायित्व संभाला जिलाधिकारी रमेन्द्र त्रिपाठी ने । जिन्होंने विशिष्ट अतिथि पुलिस अधीक्षक अमिताभ ठाकुर के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरूआत की । फिर तो भारती बन्धु ने कभी माटी में बैराग्य के पथ पर लोगों को ले चलने में अपने गीतों को सीढी बना दिया ।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से वरिष्ठ साहित्यकार अष्टभुजा शुक्ल ने कबीर पर भूमिका के दो शब्द कहे । जबकि उपंहार उपदेयता प्रदीप चंद पांडेय ने की । कार्यक्रम में जिलाधिकारी,भारती बंधु, वरिष्ठ ललित निबंधकार अष्टभुजा शुक्ल व विधायक जगदम्बिका पाल को अंगवस्त्रम भी प्रदान किया गया । कार्यक्रम में क्षेत्र के तमाम गणमान्य लोग मौजूद थे ।
(सहारा समाचार से साभार)

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